मेरी माँ पर निबंध | Essay On My Mother In Hindi [NEW]

आज हम, उनके बारे में बात करेंगे जिन्की वजह से हम सब इस दुनिया में है। जिन्को भगवान ने भी अपने से बड़ा दरजा दिया है इस दुनिया में। जिन्को देखकर ही अपना दिन शुरू होता है या जिन्की गोद में सर रखकर सौ जाने से ही सुख भरी निंद आती है। ये और कोई नहीं वो माँ है। जी हा हम मेरी माँ का महत्व पर निबंध लिखेंगे।

Essay On My Mother In Hindi | माँ का महत्व पर निबंध

प्रस्तावना

माँ की ममता पर लेख

मा कोन है? माँ को इस दुनिया में इतना सम्मान क्यू दिया जाता है? आख़िर माँ को धरती पर भगवान का रूप क्यू कहा जाता है?

तो दोस्तो माँ वो है जो हमें जन्म देती है, हमारा लालन पोषण करती है। हमें दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार देती है। हमारे लिए पूरी दुनिया की खुशियां मांगती है। हमें जरा सा भी दर्द हो तो जान पर हमारी माँ के बन आती है।

जो हमारे लिए भगवान से भी लड़ती है। बिना अपनी जान की परवाह करे हमे 9 महिने अपनी कोख में रखती है।और  फिर ना सहने वाली पीड़ा सहकर हमें जनम देती है।

याही होती है माँ।

माँ कोई एक शब्द नहीं है। माँ पूरी दुनिया होती है।

माँ कोशब्दों में बयान नहीं करा जा सकता।

माँ का महत्व पर निबंध

कोई बालक जन्म लेने के बाद जो पहला शब्द बोलता है वो होता है माँ। जिस्की उंगली पकड़कर के चलना सिखता है वो होती है माँ।

माँ के अनेक रूप होते हैं।

पर माँ हर एक रूप में माँ होती है।

माँ कभी दोस्त होती है, तो कबी शिक्षक।

माँ हमें डांट के कुछ सिखाती है, तो प्यार से हमे सही राह भी दिखती है| 

माँ हमेशा अपने बच्चों को सभी परशानी से लड़ना सिखाती है, या जब बच्चे पर कुछ परशानी आए तो बच्चों के आगे भी खड़ी हो जाती है।

अगर बच्चा किसी चीज में असफल होता है तो उसका मार्गदर्शन करती है, या उसे फिर से उस चीज को करने की प्रेरणा भी देती है।

माँ का दिल हमें अपने बच्चे के लिए धलडकता है। बच्चों के बताने से पहले माँ समझ जाति है के बच्चे को क्या चाइये । माँ दुनिया में अपने बच्चों की सबसे अच्छी दोस्त होती है।

माँ का रिश्ता 

एक स्त्री अपने जीवन में ना जाने कितने रिश्ते निभाती है।

कबी वो बेटी होती है तो कभी बहन।

कबी वो बहू होती है तो कबी सास।

पर इन सबमे जो एक सबसे अहम रिश्ता होता है तो वो होता है माँ का।

तबी तो कहते हैं एक स्त्री पूरी तबी होती है जब वो माँ बनती है।

वो माँ बनने का एहसास कुछ अलग ही होता है।

ऐसी खुशी जो सबसे अलग होती है।

सबसे प्यारी होती है।

माँ अपने बच्चों को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती है।

तबी तो कहते हैं पूत कपूत सुने है पर न माता सुनी कुमाता।

माँ कभी अपने बच्चों का बुरा नहीं सोचसकती, माँ के लिए अपने बच्चों की ख़ुशी ही सब कुछ होती है।

अगर बालक भूखा हो तो माता अपने हिस्से का भी खाना अपने बालक को खिलाती है और खुद भुकी रह जाती है।

यही होता है माता का प्यार।

माता का शिक्षक वाला रूप

कहने को तो मेरी माँ पर ना जाने कितनी देर बात करलू, पर जब माँ के ऊपर कुछ लिखने की बात आती है तो माँ के ख्यालो में या माँ की ममता के बारे में ही बस सोचता रह जाता हूं।

सबी कहते हैं के बालक का पहला स्कूल घर-परिवार होता है और पहली शिक्षक माँ होती है।

सब सही कहते हैं, हमे शुरू में सब माँ से ही तो सीखने को मिला है।

अपने जीवन का पहला शब्द भी हम माँ बोलते है। माँ का पल्लू पकड़ के ही हम चलना सिखते हैं।

माँ ही अपने सब अच्छी आदते सिखाती है या माँ ही हमें सारी अच्छी चीजे सिखती है।

माँ ही हमें गलती पर टोकती है तो माँ ही हमें अच्छे कामो पर शबाशी देती है।

माँ ही हमें खाना सिखाती है या माँ ही हमें अच्छे से कपड़े पहनना सिखाती है।

माँ ही दूसरो से बात करना सिखती है। जो एक शिक्षक नहीं सिखा सकती वो माँ सिखाती है।

बचपन में किसी किताब में पढ़ा था। 

के भगवान् हर जगह खुद नहीं हो सकते इस लिए उन्होंने माँ बनाई।

आज लगता है के सही ही पढ़ा था.

क्यूंकि माँ है तो हम है, वरना हम कबि होते ही नहीं।

जज्बात अलग है पर बात तो एक हैं ,

उसे माँ कहू या भगवान बात तो एक है ।

 

तो दोस्तों ये था मेरी माँ पर निबंध Essay On My Mother In Hindi. अगर अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे.

 

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